tulsidas k dohe Archive

तुलसीदास के 51 अनमोल दोहे

चित्रकुट के घाट पर भई संतन की भीर। तुलसीदास चंदन घिसे तिलक करे रघुबीर।। तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर। सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।। गोधन गजधन बाजिधन और रतन धन खान। जब आवत सन्‍तोष …
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