51 Life Changing चाणक्य नीति Follow कीजिए, आप कभी असफल नहीं हो सकते।

Chankya Niti in Hindi - 51 Life Changing चाणक्य नीति

Chankya Niti in Hindi – 51 Life Changing चाणक्य नीति

जो व्‍यक्ति जिस काम में कुशल हो, उसे उसी काम में लगाना चाहिए।

Chanakya Niti

हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्‍वार्थ जरूर होता है। यह जीवन का एक कडवा सच है।

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मूर्ख व्‍यक्तियों से हमेंशा मूर्खों जैसी ही भाषा बोलनी चाहिए।

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मूर्खों से तारीफ सुनने से अच्‍छा तो ये है कि आप बुद्धिमान व्‍यक्ति से डांट सुन लें।

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केवल मात्र साहस के भरोसे कभी भी किसी भी कार्य को पूरा नहीं किया जा सकता।

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बदनामी का भय, सभी प्रकार के भय में, सबसे बडा भय होता है।

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कुबेर भी अगर अपनी आय से ज्‍यादा खर्च करे, तो कंगाल हो जाएगा।

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जो व्‍यक्ति अपने कार्यों की शीघ्र सिद्धि चाहता है, वह कभी भी नक्षत्रों की प्रतीक्षा नहीं करता।

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भगवान, चित्रों में नहीं, अपितु शरीर में बसते हैं। इसलिए अपनी आत्‍मा को ही मंदिर बनाईए।

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जो व्‍यक्ति आँखे होते हुए भी अपने कर्मो को नहीं पहचान सकता है, वह व्‍यक्ति अंधे मनुष्‍य के समान है।

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कोई भी व्‍यक्ति उस समय असफल हो जाता है जब वह ये सोच लेता है‍ कि अब वो जीत नहीं सकता।

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मुर्खों से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए क्‍योंकि इससे केवल अपना ही समय नष्‍ट होता है।

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व्‍यक्ति अपने गुणों के कारण ऊपर उठता है। किसी ऊँचे स्‍थान पर बैठ जाने मात्र से ही ऊँचा नहीं हो जाता।

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अधिक सीधा-साधा होना भी अच्‍छा नहीं होता क्‍योंकि सीधे वृक्ष पहले काटे जाते हैं।

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आलसी व्‍यक्ति का न तो वर्तमान ही होता है और न ही भविष्‍य होता है।

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सांप को दूध पिलाओगे तो विष ही बढेगा,  न कि अमृत।

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बुरे व्‍यक्ति पर क्रोध करने से पूर्व अपने आप पर ही क्रोध करना चाहिए।

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समझदार व्‍यक्ति को दूसरों के बल पर साहस नहीं दिखाना चाहिए।

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गलती तो हर मनुष्‍य से हो सकती है, किन्‍तु उस पर दृढ केवल मूर्ख व्‍यक्ति ही होते हैं।

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मनुष्‍य स्‍वयं अपने ही कर्मो के कारण जीवन में दु:खों को बुलावा देता है।

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स्‍वयं को अपनी कमजोरी कभी भी उजागर नहीं करनी चाहिए।

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मनुष्‍य को शिक्षा देने वाले दो श्रेष्‍ठ गुण्‍ा कष्‍ट और विपत्ति ही हैं। जो व्‍यक्ति साहस के साथ इन दाेनों का सामना कर लेते हैं, वे व्‍यक्ति ही विजयी होते हैं।

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किसी व्‍यक्ति को कामयाब होना है, तो उसे अच्‍छे मित्रों की जरूरत होती है और ज्‍यादा कामयाब होना है तो उसे अच्‍छे शत्रुओं की जरूरत होती है।

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कमजोर व्‍यक्ति से दुश्‍मनी करना ज्‍यादा खतरनाक हो सकता है, क्‍योंकि वह उस समय हमला करता है जिसकी आप कल्‍पना ही नहीं कर सकते।

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राजा, वेश्‍या, यमराज, अग्नि, छोटा बच्‍चा, चोर, भिखारी और कर (Tax) वसूल करने वाला अधिकारी, ये आठों कभी भी दूसरो का दुख नहीं समझते।

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यदि आप किसी अन्‍य व्‍यक्ति के लिए किसी को छोड देते हैं, तो इस बात पर हैरान मत होना, अगर वही व्‍यक्ति, आपको किसी और के लिए छोड दे।

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चन्‍द्रगुप्‍त ने कहा: जब किस्‍मत को पहले ही लिखा जा चुका है तो कोशिश करने पर क्‍या मिल जायेगा।
चाणक्‍य ने कहा: क्‍या पता किस्‍मत में यही लिखा हो कि जब कोशिश करेंगे तभी मिलेगा।

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असंभव शब्‍द का प्रयोग केवल कायर लोग ही करते हैं क्‍योंकि बहादुर और बुद्धिमान व्‍यक्ति अपना मार्ग स्‍वयं ही प्रशस्‍त कर लेते हैं।

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सज्‍जन व्‍यक्तियों पर तिल के बराबर उपकार कर दिया जाए, तो वे उसे पर्वत के समान बडा मानकर चलते हैं।

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जब तक आप स्‍वयं दौडने का साहस नहीं जुटा पाओगे, तब तक आपके लिए प्रतिस्‍पर्धा में जीतना सदा असंभव ही बना रहेगा।

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मनुष्‍य अच्‍छे कर्मो को करने से महान होता है न कि अच्‍छे कुल में जन्‍म लेने से।

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अपने दुश्‍मनों को माफ कर देना चाहिए, लेकिन उनका नाम कभी नहीं भूलना चाहिए।

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फूल की सुगंध को मिट्टी तो ग्रहण कर लेती है, लेकिन मिट्टी की गंध को फूल ग्रहण नहीं करता।

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संतुलित दिमाग के समान कोई सादगी नहीं है, संतोष के समान कोई सुख नहीं है,
लोभ के समान कोई बीमारी नहीं है और दया के समान कोई पुण्‍य नहीं है।

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जो जिसके मन में रहता है, वह उससे दूर रह कर भी दूर नहीं रहता है। लेकिन जो जिसके मन में ही नहीं रहता है, वह उसके समीप रह कर भी दूर ही रहता है।

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जैसे ही आपको लगे कि भय आपके करीब आ रहा है, वैसे ही उस पर आक्रमण करके उसे नष्‍ट कर देना चाहिए।

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यदि आप सही हैं, तो आपको गुस्‍सा होने की जरूरत ही नहीं है और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्‍सा होने का कोई हक ही नहीं है।

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सभी मित्रों में शिक्षा सबसे अच्‍छी मित्र है क्‍योंकि शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य शक्ति दोनों ही कमजोर हो जाते हैं।

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बुद्धि है, तो पैसा कमाया जा सकता है लेकिन पैसा है तो बुद्धि को हासिल नहीं किया जा सकता।

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जिस प्रकार से जंगल के एक सूखे पेड़ को आग लगा दी जाए, तो वह पूरा जंगल जला देता है। ठीक उसी प्रकार एक पापी पुत्र पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।

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व्‍यक्ति में चाहे कितने ही अच्‍छे गुण क्‍यों न हो, लेकिन अगर उस व्‍यक्ति में एक दोष है तो वह सब कुछ नष्‍ट कर सकता है।

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दुष्‍टों और काँटों से बचने के लिए केवल दो ही तरीके हैं या तो उन्‍हे जूतों से कुचल डालों या फिर उनसे दूर ही रहो।

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जो व्‍यक्ति शक्ति के न होते हुए भी, कभी मन से हार नहीं मानता, उस व्‍यक्ति को दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती है।

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आँख के अंधे व्‍यक्ति को दुनिया नहीं दिखती, काम के अंधे को विवेक नहीं दिखता, मद के अंधे व्‍यक्ति को अपने से श्रेष्‍ठ कोई नहीं दिखता और स्‍वार्थी व्‍यक्ति को कहीं भी दोष दिखाई नहीं देता।

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शांति के बराबर दूसरा कोई तप नहीं है, संतोष से बढकर कोई सुख नहीं है, लालच से बडा कोई रोग नहीं है और दया से बडा कोई धर्म नहीं है।

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किसी भी व्‍यक्ति को अपने शत्रु के द्वारा किये गए स्‍नेहपूर्ण व्‍यवहार को कभी भी दोषमुक्‍त नहीं समझना चाहिए।

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सबसे बडा गुरूमंत्र यही है कि कभी भी अपने राज दूसरों को मत बताओ अन्‍यथा वह आपको बर्बाद कर देगा।

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जिस प्रकार से दूध में जल मिलकर, दूध बन जाता है। ठीक उसी प्रकार से गुणी व्‍यक्ति का आश्रय पाकर गुणहीन भी गुणी हो जाता है।

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व्‍यक्ति को दूसरों की गलतियों से ही सीखना चाहिए क्‍योंकि यदि वह अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखेगा तो उसकी आयु कम पड जाएगी।

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यदि आप खुश रहते हैं, तो आपके दुश्‍मनों के लिए इससे बडी कोई सजा नहीं हो सकती।

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भाग्‍य भी केवल उन्‍हीं व्‍यक्तियों का साथ देता है, जो व्‍यक्ति हर संकट का सामना करके भी अपने लक्ष्‍य के प्रति दृढ़ बना रहता है।

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बुद्धिमान व्‍यक्ति का कोई शत्रु नहीं होता।

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दंड का भय न होने के कारण ही लोग अनुचित कार्य करने लगते हैं।

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मनुष्‍य अपने व्‍यवहार से स्‍वयं ही अपने मन का भेद खोल देता है।

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दुर्बल के यहाँ आश्रय लेने से सदैव दु:ख ही होता है।

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अति सुंदर होने के कारण सीता का हरण हुआ, अत्‍यंत अहंकार के कारण रावण का वध हुआ, अत्‍यधिक दान देने के कारण बलि अपना सबकुछ गवां बैठा। इसलिए हर व्‍यक्ति को अति से बचना चाहिए।

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9 Comments

  1. sachin narayan pawar barshi November 20, 2016
  2. ashish kohale November 19, 2016
  3. Meenesh dubey September 6, 2016
  4. Randhir kumar soni August 1, 2016
  5. akash April 16, 2016
  6. Ankush Singh November 2, 2015
    • vikram singh September 20, 2016
  7. Parul Agrawal November 1, 2015
    • Sumit June 15, 2016

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