तेनालीराम की बुद्धिमत्‍ता

एक बार रामनगर में चोरी की घटनाऐं बढने लगीं, जिससे लोगों में इस बात को लेकर चर्चा होने लगी। राजा को भी चिंता होने लगी कि आखिर उसके राज्‍य में चोरियां कौन कर रहा है। इस कारण राजा ने अपने सैनिको को सड़को और गलियों में तैनात कर दिया। लेकिन फिर भी राजा को संतुष्टि नहीं हुई। सो चिंता से ग्रसित राजा ने तेनाली राम को बुलाया और कहा-

तेनाली राम, तुम्‍हे तो पता ही होगा कि अपने राज्‍य में बहुत चोरियाँ हो रही हैं। तुम जितने चाहो उतने सैनिक ले जाओ, लेकिन इन चोरो को पकड़ कर राजदरबार में हाजिर करो। 

तेनाली राम ने कहा- महाराज… आप चिंता न करे, मैं चोरों को अकेले ही पकड़ लाऊंगा।

इतना कहकर तेनाली राम राज दरबार से निकला और कुछ सोच कर अपने राज्‍य में यह बात फैला दी कि उनको एक ऐसा मंत्र मिला है, जिसको पढ़ने के कारण उनके घर पर चोरी नहीं कर सकता।

लोगो में यह बात आग की तरह फैल गई और उन्‍हीं लोगों में वे दो चोर भी थे, जो चोरी किया करते थे। तेनालीराम की इस मंत्र वाली बात को सुनकर दोनों चोरों ने एक-दूसरे से कहा- चाहे जो भी मंत्र पढ़ा हो तेनालीराम, लेकिन आज तो चोरी तेनालीराम के घर पर ही करनी होगी। 

दोनों चोर रात के समय आए और तेनाली राम के घर में रखी तिजोरी से सारा धन चुरा ले गये। सुबह जब यह बात राजा के दरबारियों को पता चली, तो वे सभी तेनालीराम पर हंसने लगे और एक दूसरे से तरह-तरह की बातें करने लगे। लेकिन तभी तेनालीराम दो चोरों को बेडियो में बांध कर राज दरबार में ले आया और राजा से कहा-

महाराज… मैंने चोरों को पकड़ लिया है। यही हैं वे दोनों चोर जिन्‍हाेंने पूरे राज्‍य में जगह-जगह चोरियॉं की हैं और इन्‍होंने अपनी सभी चोरियों को स्‍वीकार भी कर लिया है।

राजा ने उन चोरों को सजा सुनाई और फिर तेनालीराम से पूछा कि- तुमने इन चोरों को कैसे पकड़ा ? 

तेनालीराम ने कहा- महाराज मैंने ही राज्‍य में यह बात फैलाई थी कि मुझे एक ऐसा मंत्र मिला है, जिसको पढ़ने से घर में चोरी नही होती। मुझे मालुम था कि चोरों तक भी यह बात जरूर पहुंची होगी और चोर अपने कभी न पकड़े जाने के अहंकार वश मेरे ही घर चोरी करने के लिए जरूर आयेंगे। परिणामस्‍वरूप मैं पहले से ही कुछ सिपाहियों के साथ अपने घर में छिपा हुआ उस कमरे की निकरानी कर रहा था, जहां तिजोरी पड़ी थी। जैसे ही ये चाेर चोरी करने आए, सिपाहियों ने उन्‍हें पकड़ लिया। 

इस प्रकार से तेनालीराम ने बुद्धिमत्‍ता पूर्ण तरीके से चोरों को पकड़ कर राजा व राज्‍य के निवासियों को चिन्‍ता मुक्‍त किया व राजा ने तेनालीराम की बुद्धिमत्‍ता के कारण उसे कीमती हीरे जवाहरातों से पुरूस्‍कृत किया।

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इस छोटी सी कहानी का Moral ये है कि समस्‍या चाहे जितनी भी बड़ी क्‍यों न हो, यदि बुद्धिमत्‍तापूर्ण तरीके से उसे हल करने की कोशिश की जाए, तो किसी भी समस्‍या का समाधान आसानी से किया जा सकता है।

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3 Comments

  1. deepak July 22, 2017
  2. Sujit December 11, 2015
    • ADMIN December 11, 2015

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