kabir aur rahim ke dohe Archive

रहीम के 51 अनमोल दोहे

छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात। कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात।। गहि सरनागति राम की, भवसागर की नाव। रहिमन जगत-उधार को, और ना कोऊ उपाय।। जेहि रहीम मन आपनो कीन्‍हो चारू चकोर। नीसी-बसर लाग्‍यो रह, …
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