hindi ke dohe Archive

सूरदास के 19 अनमोल दोहे

गोरे नंद जसोदा गोरी तू कत स्यामल। चुटकी दै दै ग्वाल नचावत हंसत सबै मुसुकात॥ कहा करौं इहि रिस के मारें खेलन हौं नहिं जात। पुनि पुनि कहत कौन है माता को है तेरो तात॥ मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायो। …

तुलसीदास के 51 अनमोल दोहे

चित्रकुट के घाट पर भई संतन की भीर। तुलसीदास चंदन घिसे तिलक करे रघुबीर।। तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर। सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।। गोधन गजधन बाजिधन और रतन धन खान। जब आवत सन्‍तोष …
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