bihari lal ke dohe in hindi Archive

बिहारी के 51 अनमोल दोहे

काजर दै नहिं ऐ री सुहागिन। आँगुरि तो री कटैगी गँड़ासा।। नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास यहि काल। अली कली में ही बिन्‍ध्‍यो आगे कौन हवाल।। कर-मुँदरी की आरसी, प्रतिबिम्बित प्‍यौ पाइ। परति गाँठि दुरजन हिये, दई नई …
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