क्‍या सफाई रखना हम सभी की जिम्‍मेदारी नहीं है?

Swachh Bharat Mission - स्वच्छ भारत मिशन

Swachh Bharat Mission – स्वच्छ भारत मिशन

गाँव के मंदिर में शिवरात्रि का मेला लगा हुआ था, बहुत ही दूर-दूर के श्रधालु उस मेले में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आ रहे थे। इसलिए भंडारे का भी आयोजन था। श्रधालु अपने प्रसाद ग्रहन करने के पात्र को वहीं फैंक देते और वहाँ से चले जाते।

मंदिर में आने वाले सभी श्रधालु बस यही सोच रहे थे कि यहां इतने लोग उपस्थित है लेकिन सफाई का किसी को भी ध्यान नही है। इसी तरह से सारे श्रधालु सोच रहे थे कि सफाई की जिम्मेदारी सिर्फ उन्ही की है क्या? और भी तो लोग हैं यहां पर, उनको भी सफाई का ध्यान रखना चाहिए।

मंदिर परिसर के चारों ओर श्रधालु जूठी पत्तल, दोनें और मिट्टी के बर्तनों को जहां-तहां फैंके जा रहे थे। धीरे-धीरे गंदगी बढ़ती ही जा रही थी।

मंदिर परिसर में महाराज स्‍वामी‘ नाम के एक युवा संत थे, जिनकी उम्र तो बहुत कम थी, लेकिन ज्ञान बहुत बड़ा। उन्होने देखा की चारों ओर बहुत गंदगी हो गई है परन्तु उस पर किसी का कोई ध्यान नही है। जितने भी श्रधालु हैं वे सभी दर्शन करते, प्रसाद ग्रहण करते और जूठन वहीं फैंक कर चल देते हैं। मंदिर परिसर में इतनी गंदगी को देखकर महाराज स्‍वामी ने अकेले ही झाडू लेकर उस गंदगी को साफ करना शुरू कर दिया। यह देख वहां जितने भी श्रधालु थे वे सभी आर्श्‍चय से महाराज को देखने लगे और उन सभी श्रधालुओ का महाराज के प्रति आदर भाव जागृत होने लगा। महाराज के चारो ओर भीड़ इकठ्ठा हो गई।

भीड़ को देख महाराज स्‍वामी बोले- “आप सभी मुझे इस तरह से हैरत भरी नजरों से क्‍यों देख रहे हैमैं कोई अजूबा नही हूँ और मैं कोई अनोखा काम भी नही कर रहा हूँ। अन्‍तर सिर्फ इतना है कि आप यह सफाई अपने घरों तक सीमित रखना चाहते हैं और मैं उसी सफाई को पूरे देश में फैलाना चाहता हूँ।

महाराज स्‍वामी बोले- “आप सभी को मालूम नहीं है कि जिस तरह से आप अपने घर को रोज़ साफ रखते है ठीक उसी प्रकार से आप सभी को यह मंदिर परिसर भी साफ रखना चाहिए। मंदिर परिसर ही नही अपितु यह पूरा देश भी तो आप ही की सम्‍पति है। आप श्रधालु जन अपनी ही संपत्ति को इतना गंदा कैसे कर सकते है। जरा सोचिए कि आपके घर के सामने कोई यही गंदगी करे तो, आप सभी को कैसा लगेगा। मुझमें और आप लोगों में बस इतना ही अन्‍तर है कि मैं जागरूक हूँ और आप लोग नहीं हैं।

महाराज स्‍वामी की ये बातें सुनकर वहां के सभी श्रधालु भी महाराज के साथ मंदिर परिसर की सफाई में लग गए और प्रतिज्ञा ली कि वे सभी आज से ही सफाई को महत्‍व देंगे।

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