आप कमाई और बाप कमाई

Stories with Morals in Hindi - आप कमाई और बाप कमाई

Stories with Morals in Hindi

Stories with Morals in Hindi – एक समय एक नगर में धनवान सेठ र‍हता था। उसके परिवार में उसका पुत्र, उसकी पुत्री एवं उसकी पत्‍नि थी। पुत्री का विवाह हो चुका था और वह कुछ दिनों के लिए मायके आई हुई थी जबकि उसका पुत्र बहुत ही नालायक हो गया था। वह अपनी मित्र मण्‍डली के साथ पिता के धन का दुरूपयोग करते हुए ऐश-मौज करता र‍हता और उसके पिता को ये बात बहुत दु:खी करती थी। इसलिए एक दिन उन्‍होंने अपने पुत्र को सुधारने के लिए एक तरकीब निकाली और उसे अपने पास बुलाकर कहा-

मैं लम्‍बे समय से देख रहा हूँ कि तुम अपना सारा समय अपने फालतु के मित्रों के साथ व्‍यर्थ गंवा रहे हो और पूरी तरह से नालायक हो चुके हो। मुझे  तुम्‍हारे सुधरने की कोई उम्‍मीद भी नजर नहीं आती। इसलिए यदि तुम आज शाम तक कुछ कमा कर नहीं लाए, तो लौटकर घर आने की जरूरत नहीं है, न ही मेरी धन-सम्‍पत्ति में तुम्‍हारा कोई अधिकार होगा क्‍योंकि मैं अपनी सारी धन-सम्‍पत्ति गरीबों में दान करके स्‍वयं तुम्‍हारी माँ के साथ तीर्थ यात्रा पर चला जाउंगा।

पिता की इतनी कड़ी बात सुनकर पुत्र बडा चिंतित हुआ एवं यहाँ-वहाँ घूमता रहा। यह देख उसकी माँ ने उसकी चिंता का कारण पूछा तो पुत्र ने अपनी माँ को पिता की कही गई बात बता दी।

पुत्र की चिंता से दु:खी होकर उसकी माँ ने उसे कुछ रूपये दे दिये। पुत्र रूपये लेकर अपने पिता के पास गया एवं पिता को रूपये देकर कहा-

ये रूपये मै कमा कर लाया हुँ।

पिता ने वे रूपए फिर से उसे देते हुए कहा-

जाकर इन रूपयों को उस कुएं मे फेंक दो।

पुत्र ने अपने पिता की बात मानते हुए उनके सामने ही रूपये कुऐं में फेंक दिये, जिससे सेठ को अंदाजा हो गया कि रूपए उसके पुत्र ने कमाए नहीं थे बल्कि कहीं से लाए थे। सेठ को जब ये बात पता चली कि रूपये उसकी माँ ने दिये थे, तो उसने उसे कुछ दिनों के लिए उसके पीहर भेज दिया और अगले ही दिन अपने पुत्र को फिर बुलाया और कहा-

एक ही दिन कमाने से जिन्‍दगी नहीं चलती। इसलिए आज साम तक कुछ और रूपए कमा कर लाओ।

पुत्र फिर से बडा चिंतित हुआ तभी उसको अपनी बहन की याद आई। वो अपनी बहन के पास गया एवं पिता द्वारा कही गई बात बताई। इस बार उसकी बहन ने उसकी मदद करते हुए उसे कुछ रूपये दे दिये, जिसे लेकर वह फिर से अपने पिता के पास गया और पिता ने फिर से उसे उन पैसों को कुएं में फेंकने के लिए कहा जिसे पुत्र ने बिना किसी हिचकिचाहट के फिर से कुऐं में फेंक दिया।

लेकिन इस बार सेठ को फिर से पता चल गया कि रूपये उसकी बेटी ने दिये थे। सो सेठ ने उसे भी उसके ससुराल भेज दिया और अगले ही दिन अपने पुत्र को बुलाकर फिर से पैसा कमाकर लाने के लिए कहा। लेकिन इस बार पुत्र कुछ अधिक ही चिन्तित था क्‍योंकि आज उसकी मदद करने के लिए माँ और बहन दोनों नहीं थे। उसी समय उसको अपने मित्र दिखाई दिये। सेठ के पुत्र ने अपने मित्रो से पिता द्वारा कही गई सारी बात बताते हुए कहा कि-

आज तुम लोग मेरी मदद कर दो, अन्‍यथा पिताजी मुझे घर से निकाल देंगे।

लेकिन उसके सभी मित्रों ने अलग-अलग तरह के बहाने बनाकर उसकी सहायता करने से मना कर दिया। पुत्र बडा परेशान हुआ क्‍योंकि शाम होने ही वाली थी। अचानक उसकी नजर एक दुकान पर पड़ी जिसके बाहर बहुत सारी धान की बोरियाँ पड़ी हुई थीं और ऐसा लग रहा था कि वह दुकानदार किसी हमाल की तलाश कर रहा था जो उन धान की बोरियों को गोदाम में रख दे। वह सेठ पुत्र उस दुकानदार के पास पहुंचा और कहा-

सेठ जी… कोई काम हो तो बताऐं।

दुकानदार ने धान की बोरियों की तरफ ईशारा करते हुए कहा-

इन सभी धान की बोरियों को गोदाम में रख दो। सभी का पांच रूपया दे दूंगा।

सेठ पुत्र राजी हो गया और धान की सभी बोरियों को गोदाम में रख दिया, जिसके बदले में सेठ ने उसे पांच रूपया दे दिया। जिन्‍दगी में पहली बार मेहनत का काम करने की वजह से सेठ पुत्र काफी थक गया था। पसीने से तर-बतर हुआ वह अपने घर पहुँचा और पिता के हाथ में रूपए देने लगा। पिता ने रूपए लिए बिना ही कह दिया कि-

ये रूपये ले जाकर उसी कुए मे फेंक आओ।

लेकिन इस बार पुत्र ने कहा कि-

मैं ये रूपये नहीं फेकुंगा क्‍योंकि ये रूपए मैंने बड़ी मेहनत से धान की ढेर सारी बोरियाें को गोदाम में रखकर कमाए हैं। ये मेरी मेहनत की कमाई है। मैं इन्‍हें हरगिज कुऐं में नहीं फेंकूंगा।

पुत्र का ये जवाब सुनकर पिता को विश्‍वास हो गया कि आज उसका पुत्र सचमुच रूपए कमाकर लाया है न कि किसी से मांग कर। साथ ही पुत्र को भी उन मित्रों की सच्‍चाई का पता चल गया जो केवल उसके धन पर ऐश-मौज करने के लिए ही उसके साथ मित्रता किए हुए थे। उस दिन के बाद उसने अपने सभी मित्रों से ऐसी स्‍वार्थ वाली मित्रता समाप्‍त कर ली और पिता के व्‍यवसाय में हाथ बंटाने लगा।

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8 Comments

  1. Jaswinder Singh Chahal November 20, 2016
  2. Rajiv kumar November 18, 2016
  3. ashwin September 6, 2016
  4. simran July 3, 2016
  5. Rathod jagdish subhash May 25, 2016
  6. Rathod jagdish subhash May 25, 2016
  7. Alka Rana April 8, 2016
  8. lakshman kamat April 6, 2016

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