कठिन परिश्रम ही काफी नहीं है सफल होने के लिए।

Short Stories with Moral Values

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मोहन वैसे तो बहुत कम पढ़ा-लिखा लड़का था, लेकिन मेहनती बहुत था। कम पढ़ा लिखा होने की वजह से उसको कहीं नौकरी नहीं मिलती थी।

एक दिन मोहन एक लकड़ी के व्यापारी के पास पहुँचा और पूछा, “सेठजी… क्‍या मेरे लायक कोई काम मिलेगा?

व्‍यापारी ने मोहन को जंगल से लकड़ी काटने का काम दे दिया।

मोहन खुशी-खुशी सुबह जल्‍दी ही जंगल पहुँच गया और उसने पहले ही दिन 20 पेड़ काट दिए।

मोहन ने सेठजी से कहा, “सेठजी… मैंने आज 20 पेड़ काट दिए।

सेठजी ने मोहन की तरीफ करते हूए कहा, “अच्‍छा है, इसी तरह दिल लगाकर काम करते रहो, भविष्‍य में बहुत उन्‍नति करोगे।

मोहन सेठजी की ये बात सुनकर और खुश हो गया।

अगले दिन मोहन काम पर गया लेकिन आज उसने केवल 18 पेड़ ही काटे।

मोहन, फिर से सेठजी के पास गया और बोला, ”सेठजी… आज मैंने 18 पेड़ काटेे।

सेठजी ने फिर से पहले की तरह ही मोहन को देखकर कहा, “अच्‍छा है, ऐसे ही मेहनत करते रहो, बहुत उन्‍नति करोगे।

मोहन खुशी-खुशी अपने घर आया और अगले दिन सवेरे जंगल पहुँच गया, लेकिन आज पूरे दिन में मोहन ने केवल 10 पेड़ ही काटे।”

वह सेठजी के पास जाकर बोला, “सेठजी… आज केवल मैं 10 पेड़ ही काट पाया।

व्यापारी ने कहा, “कोई बात नहीं, मेहनत करते रहो, तुम बहुत आगे जाओगे।

समय के साथ ही मोहन की पेड़ों की कटाई की संख्‍या धीरे-धीरे कम होती जा रही थी और एक दिन उसने केवल पूरे दिन में एक ही पेड़ काटा।

मोहन बड़े ही उदास मन से सेठजी के पास गया और कहने लगा, “सेठजी… मैं सारे दिन मेहनत से काम करता हूँ, लेकिन फिर भी पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसा क्यों?

व्यापारी ने मोहन से पूछा, “मोहन तुमने अपनी कुल्हाड़ी को धार कब लगाई थी?

मोहन को कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी सेठजी ने फिर पूछा, “तुमने अपनी कुल्हाड़ी को धार कब लगाई थी?

मोहन बोला, “धार, सेठजी मेरे पास तो धार लगाने का समय ही नहीं बचता, मैं तो सारे दिन पेड़ कटाने में ही व्यस्त रहता हूँ।

व्यापारी, “मोहन… बस इसीलिए तुम्हारे पेड़ों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। यदि तुम हर रोज सुबह पेड़ काटना शुरू करने से पहले थोड़ी देर अपनी कुल्‍हाड़ी की धार तेज कर लो, तो कम मेहनत से भी अधिक पेड़ काट सकते हो।

मोहन को अपने द्वारा की जाने वाली भूल का अहसास हुआ और अगले दिन उसने फिर 20 पेड़ काटे। उसे उसकी सफलता की कुंजी प्राप्‍त हो चुकी थी।

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अक्‍सर हम लोग वही गलती करते हैं, जो मोहन कर रहा था। हम सफलता प्राप्‍त करने के लिए कठिन परिश्रम तो करते हैं, लेकिन अपने औजारों को धार देना भूल जाते हैं। जबकि केवल कठिन परिश्रम से ही उन्‍नति नहीं होती, बल्कि समय-समय पर हमें हमारे औजारों को धार देना भी जरूरी होता है क्‍योंकि हमारी उन्‍नति, हमारे औजारों पर ही निर्भर है।

इसलिए आप चाहे जिस किसी भी Profession में हों, यदि आप अपनी योग्‍यताओं व कुशलताओं (Abilities and Skills) को वर्तमान समय के अनुरूप Update नहीं करते हैं, तो इसका मतलब यही है कि आप अपने उन्‍हीं औजारों को धार नहीं दे रहे हैं, जिनकी वजह से आपके पास आपका Job या Profession है।

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अच्‍छा लगा हो, तो Like/Share कर दीजिए।

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6 Comments

  1. Ravi Shankar September 17, 2016
  2. sachin sundi June 6, 2016
  3. Raj May 23, 2016
  4. Amrendra Thakur April 28, 2016
  5. Gopal Das April 27, 2016
  6. Digambar April 26, 2016

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