इन्‍सान से ज्‍यादा खतरनाक कोई नहीं है।

Kahaniya in Hindi with Moral - Hindi

Kahaniya in Hindi with Moral – Hindi

Kahaniya in Hindi with Moral – सत्‍यदेव नाम का एक व्‍यक्ति काम की तलाश में दूसरे नगर जा रहा था। रास्‍ते में उसे एक कुंआ दिखाई दिया। काफी देर से चलने के कारण उसे प्‍यास भी लगी थी। इसलिए वह पानी पीने के लिए उस कुएं तक गया।

वह कुएं के पास पहुँचकर उसमें देखने लगा तभी उस कुंए में उसे एक चीता, एक सांप और एक आदमी दिखाई दिया।

चीते ने सत्‍यदेव से आग्रह करते हुए कुएं से बाहर निकालने के लिए कहा, सत्‍यदेव बोला, “तुम ठहरे जंगली जानवर। मैं तुम्‍हें निकाल दूंगा तो तुम मुझे ही खा जाओगे।

चीते ने कहा, “मैं तुम्‍हें विश्‍वास दिलाता हूँ कि मैं तुम्‍हे नहीं खाऊंगा और जीवनभर तुम्‍हारा उपकार याद रखुंगा। जब भी तुम्‍हे मेरी जरूरत पड़े तो यहीं पास के झरने के पास मेरी गुफा है। तुम मुझे जरूर याद करना, मैं तुम्‍हारी सहायता जरूर करूंगा।

सत्‍यदेव ने चीते की प्रार्थना का विश्‍वास करते हुए उसे बाहर निकाल दिया।

अब जब चीता बाहर निकल गया तो सांप ने भी चीते की तरह ही प्रार्थना की कि,, “उसे भी बाहर निकाल दे। जरूरत पड़ने पर वहा भी उसके किसी न किसी काम जरूर आएगा।

सत्‍यदेव ने सांप को भी बाहर निकाल दिया।

आदमी को भी बाहर निकलना था इसलिए वह बोला, “मित्र… मैं सुनार हूँ और यहाँ से कुछ ही दूर विराटनगर में रहता हूँ। जरूरत के समय मुझे याद करना।

सत्‍यदेव ने आदमी को भी बाहर निकाल दिया।

कुछ समय बाद सत्‍यदेव मित्रों से मिलने के इरादे से चीते के पास गया। चीते ने अपने मित्र सत्‍यदेव की बड़ी आवभगत की और जाते समय उसे भेंट में सोने के गहने दिए।

सत्‍यदेव सुनार मित्र के पास गया और उसने उस गहने से नए गहने बनाने के लिए कहा।

सुनार के नगर में राजा के कुछ गहने चोरी हो गए थे जिनकी सूचना देने वाले को पुरस्‍कार देने की घोषणा हुई थी। सत्‍यदेव जो गहने लाया था वह राजा के ही थे। सुनार लालच में आ गया आैर उन गहनों के बारे में राजमहल में सूचना दे दी।सिपाहियों ने आकर सत्‍यदेव को पकड़ लिया।

सत्‍यदेव अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सिपाहियों को उस चीते के पास ले गया जिसने उसे वे गहने दिए थे। जब सिपाहियों ने चीते से इस बारे में पूंछा तो उसने बताया कि, ”ये गहने उसने एक व्‍यक्ति का शिकार कर उसी के पास से प्राप्‍त किए थे।

चीते का ये जवाब सुनकर सत्‍यदेव को निर्दोष होने के कारण छोड़ दिया।

सत्‍यदेव अपने सुनार मित्र के इस दुर्रव्‍यवहार के कारण दु:खी होकर अपने घर लौट रहा था तभी रास्‍ते में उसे वह सांप मिला जिसे उसने कुंए में से बाहर निकाला था। सांप ने तुरंत ही सत्‍यदेव को पहचान लिया। वह सत्‍यदेव को अपने बिल तक लेकर गया और एक बहुमूल्‍य मणि देते हुए कहा, “यह करामाती मणि है। इसे हमेंशा ही अपने पास रखना क्‍योंकि ये जब तक तुम्‍हारे पास रहेगी, तुम्‍हे किसी भी चीज की कमी नहीं होगी।

सत्‍यदेव मन ही मन सोच रहा था “जानवर, जिनसे मैं खतरा महसूस कर रहा था, उनसे मुझे सम्‍मान मिला, उपहार मिला तथा मदद भी मिली और आदमी, जिसे कुंए से बाहर निकालते समय मेरे मन में थोड़ी भी झिझक नहीं थी,उसी ने मेरे उपकार का उपहार, विश्‍वासघात से दिया।

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3 Comments

  1. Neetu April 25, 2016
  2. Digambar April 22, 2016
  3. vivekanand bharti April 13, 2016

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